A True Story Of A Divorced Couple

       




           True Story Of A Divorced Couple    

            (तलाक शुदा पति पत्नी की सच्ची कहानी)

 हेलो दोस्तों, आज मैं आपको एक सच्ची कहानी बताने जा रहा हूँ। ये कोई काल्पनिक कहानी नही है बल्कि एक सत्य घटना है। उम्मीद है कि आप लोगो को पसंद आएगी और जो गलतियां इन दोनों ने की वो आप लोग बिल्कुल भी नही करोगे। ये कहानी लिखने का उद्देश्य भी यही है कि आप लोग भी गुस्से में कोई फैसला लेने से पहले सौ बार सोचे क्योंकि रिश्ता टूटने के बाद ही उसकी अहमियत का पता चलता है। 



हुआ यूं कि एक लड़का था , जिसका नाम अनिकेत ( काल्पनिक नाम ) था। उसके घर में मम्मी, पापा,दादी और दो छोटी बहने थी। अनिकेत बचपन से ही शांत स्वाभाव का लड़का था। वो बहुत कम बोलता था । अक्सर लोग उसकी आवाज़ सुनने के लिए तरस जाते थे। बात कम करना , ज्यादा हँसी मज़ाक उसे पसंद नही था। उसके पापा एक सोनार के कारीगर थे। उसके पापा चाहते थे कि अनिकेत भी उनके काम मे उनका हाथ बंटाए लेकिन उसको खेलने से फुरसत कहा थी , जब अनिकेत दसवीं कक्षा में पहुँचा , तब तक उसके पापा एक छोटी सी दुकान खोल चुके थे। अब अनिकेत पढ़ाई के साथ साथ अपने पापा का व्यापार भी संभाल रहा था। वह व्यापार में काफी अच्छे से मन लगा रहा था। अनिकेत को सब बहुत प्यार करते थे और अनिकेत भी सबको बहुत प्यार करता था। अनिकेत की सारी जरूरते भी पूरी हो जाती थीं। अनिकेत की परीक्षा अब आने वाली थी , वो मेहनत बहुत करता था , सुबह स्कूल जाता था और फिर स्कूल से वापस आकर अपने पापा की दुकान जाता और वही पर अपनी पढ़ाई करता था। परीक्षा नज़दीक आ रही थी और अनिकेत बहुत मन लगाकर पढ़ाई कर रहा था। जैसे जैसे उसका रिजल्ट आने वाला था वैसे वैसे वो बहुत परेशान होने लगा था क्योंकि एक तरह से वो बहुत डरपोक भी था । ख़ैर रिजल्ट आया और अनिकेत बहुत अच्छे नम्बरों से पास हुआ। फिर उसने अपनी आगे की पढ़ाई जारी रखी और वह ग्यारहवीं कक्षा में पहुँचा । जब अनिकेत के पेपर चल रहे थे तभी उसकी दादी जी का देहांत हो गया था। अनिकेत बहुत दुखी हुआ। दादी उसको बहुत प्यार करती थीं और अनिकेत भी अपनी दादी को बहुत प्यार करता था। ख़ैर अब अनिकेत बारहवीं कक्षा में पहुंच चुका था । उसने बहुत मेहनत की और उसका रिजल्ट भी उसके मनोनुकूल आया । अब क्या करे एक प्रश्न उसके दिमाग मे घूम रहा था। लेकिन अकेला था , तो बाहर पढ़ाई के लिए जा भी नही सकता था । उसका मन एक इंजीनियरिंग कॉलेज में एडमिशन लेने का था , लेकिन एकलौता लड़का होने की वजह से परिवार वालो ने उसे बाहर जाने नही दिया । अनिकेत ने हँसी ख़ुशी स्नातक में एडमिशन लियाऔर पढ़ाई के साथ साथ अपने पापा के व्यापार में भी हाथ बंटाने लगा। वैसे तो अनिकेत बहुत जिद्दी स्वभाव का था, अगर उसको कोई डांट देता तो वो मुँह फुलाकर बैठ जाता था लेकिन एक अच्छाई भी थी कि उसका गुस्सा ज्यादा देर तक नही होता था । सामने वाला जब कोई हंस देता तो वो भी सब कुछ भूल कर हँसने लगता था। लेकिन दिल का बहुत सच्चा था । किसी के बारे में गलत नही सोचता था और बहुत ही भावुक किस्म का लड़का था। अगर कोई उसके सामने रो दे तो बेचारा उसके भी एक दो आंसू निकल आते थे ।स्वभाव से अनिकेत बहुत ही सरल और सीधा था। उसके अंदर जाल फ़रेब कुछ नही था। धीरे धीरे अनिकेत अब बड़ा हो चुका था और शादी के लायक भी। अब लड़की वाले भी आने लगे थे। जब लड़की वाले अनिकेत के घर देखने जाते तो वह दुबक कर अपने कमरे में छिप जाता और चोरी छुपे सबको देखता था । उसको बहुत शर्म आती थी , बहुत ज्यादा शर्मीला लड़का था। अनिकेत का मन अभी शादी करने का नही था उसका मन पढ़ने का था , ख़ैर जब लड़की वाले आये तो बात हो गयी । अब लड़की देखने की बारी आई । पहले लड़की के पापा , भाई बैठे थे , कुछ और भी रिश्तेदार थे । चाय नाश्ता आ गया और अनिकेत चाय पीने में व्यस्त था। तभी उसकी नज़र सामने से आ रही एक लड़की पर पड़ी जो किसी औरत के साथ आ रही थी। पास से देखने पर वो लड़की अनिकेत को बहुत पसंद आई और उसने शादी के लिए तुरंत हाँ कर दी। उसके मन मे लड्डू फुट पड़े। सोचने लगा जल्दी से शादी हो जाये इससे। फिर क्या लड़की को सामने बैठाया गया बिल्कुल अनिकेत के। लड़की ने चुपके से अनिकेत को देखा फिर नज़र हटा ली। लेकिन अनिकेत चाय पीने के बहाने उसको देखे जा रहा था । लड़की की भाभी अनिकेत को बार बार देखे जा रही थीं। किसी ने कहा कि दोनों लोग अकेले में बात कर लो । अनिकेत बहुत ज्यादा नर्वस हो गया था क्योंकि उसने पहले कभी किसी भी लड़की से कोई बात नही की थी। बहुत हिम्मत करके उसने लड़की से उसका नाम पूछा , तो लड़की ने अपना नाम सरिता( काल्पनिक नाम ) बताया। बस फिर क्या दोनो तरफ से हाँ हो गयी। दोनो परिवार अपने अपने घर चले गए । कुछ दिनों बाद सरिता के घरवाले अनिकेत के घर शादी की बात पक्की करने गए , दोनों की शादी की तारीख निकली । फिर क्या दोनो तरफ तैयारियां शुरू हो गयी । इधर अनिकेत की पढ़ाई का आखिरी साल था। अनिकेत शर्मिला किस्म का लड़का था तो वो कभी सरिता को फ़ोन करने की हिम्मत नही कर पाया। लेकिन मन ही मन सोचता था कि कैसे फ़ोन करूँ। अचानक एक दिन सरिता की सहेली का फ़ोन आया कि आप लोग फ़ोन पर बात कर लिया कीजिये। शादी से पहले एक दूसरे की पसंद नापसंद जान लीजिये । फिर क्या अनिकेत की खुशी का ठिकाना ही नही रहा। दोनो के बीच बातचीत का सिलसिला शुरू हो गया। इसी बीच खबर आई कि सरिता की दादी का देहांत हो गया है। सरिता बहुत दुखी हुई। शादी के दिन भी अब करीब आ रहे थे और दोनों ही तरफ जोर शोर से तैयारियां चल रही थीं । जैसे जैसे दिन नज़दीक आ रहे थे दोनो के दिल की धड़कनें भी बढ़ती जा रही थीं। खैर वो दिन आ ही गया जिसका सबको बेसब्री से इंतज़ार था। खूब ढोल नांगड़े बजे , खूब शहनाइयां बजी । दोनो परिवार खुश थे। आज सरिता और अनिकेत एक दूसरे के हो गए। अगले दिन जब सरिता विदा होकर अपनी ससुराल पहुँची तो उसका भव्य स्वागत किया गया। सरिता भी मन ही मन बहुत ज्यादा खुश थी। सारी रस्मे और रीती रिवाज़ निभाने के बाद दोनों एक दूसरे के हो गए। दोनों बहुत खुश थे और एक दूसरे को बहुत प्यार करते थे। दोनो एक दूसरे के बिना रह नही सकते थे। जितना प्यार अनिकेत सरिता को करता था उससे कही ज्यादा प्यार सरिता अनिकेत को करती थी। कभी कभी अनिकेत को सरिता की कुछ आदतें अच्छी नहीं लगती थीं लेकिन वो कुछ कहता नही था। दोनो लोग हँसी खुशी रहने लगे और कुछ दिनों बाद कहीं घूमने गए। सरिता इससे पहले कही भी हिल स्टेशन नही गयी थी अनिकेत यह बात जानता था , इसीलिए वह सरिता को किसी हिल स्टेशन ले गया ।






 सरिता भी बहुत खुश थी।। दोनो ने साथ मे बिताये हुए पलों को अपने मोबाइल में उतार लिए। दोनों खुश थे । कुछ दिनों बाद जब दोनों वापस लौटे तो वहां के किस्से सबको बताये। सब कुछ अच्छे से चल रहा था कि अचानक एक दिन दोनो के बीच कुछ अनबन हो गयी। लेकिन बात आगे न बढ़े , इसलिए अनिकेत शांत हो गया। कुछ दिनों बाद फिर दोनों के बीच अनबन हो गयी और दोनों के बीच मामला कुछ ज्यादा बढ़ गया। किसी तरह दोनों को शांत किया गया लेकिन सरिता ने कुछ ज्यादा ही कह दिया था तो अनिकेत को कुछ बाते बुरी लग गयी। दोनो शांत तो हो गए लेकिन दोनों के बीच कुछ दूरियां जरूर हो गईं।अब दोनों एक दूसरे से पहले की तरह व्यवहार नही करते थे। कुछ फासले से हो गए थे दोनो के बीच। लेकिन धीरे धीरे सब फिर से शांत हो गया। कुछ दिनों बाद जब अनिकेत को पता चला कि वो पिता बनने वाला है तो वह बहुत खुश हुआ। पूरे घर मे खुशी का माहौल सा बन गया। सरिता भी बहुत खुश थी ।दोनों लोग अपनी पिछली बातों को भूलकर आगे बढ़ रहे थे । इस बीच अनिकेत सरिता का बहुत ध्यान रखता था और सरिता भी अनिकेत को अब शिकायत का कोई मौका नही देती थी।अनिकेत को जब पता चला कि वह पिता बन गया तो वह बहुत ख़ुश हुआ। वह एक बेटे का पिता बन चुका था । वो बहुत खुश हुआ। घर मे उत्सव की तैयारी होने लगी। अनिकेत छोटे बच्चो को खिलाने में डरता था । इससे पहले उसने छोटे बच्चो को कभी भी नहीं खिलाया था। लेकिन जब वह पिता बना तब उसने अपने बेटे को गोद में लिया और खिलाया।धीरे धीरे आनिकेत का बेटा बड़ा होने लगा । अनिकेत ने अपने बेटे का नाम सूर्या (काल्पनिक नाम) रखा था। अब सूर्या दो साल का हो चुका था। धीरे धीरे उसकी शैतानियाँ भी बढ़ती जा रही थीं। सब लोग सूर्या को बहुत खिलाते थे।। इसी बीच अनिकेत की छोटी बहन की शादी तय हो गयी। और कुछ दिनों बाद वह भी विदा होकर अपनी ससुराल चली हई। अब घर मे केवल पांच लोग ही बचे। सब कुछ अच्छे से चल रहा था , अब सरिता भी अनिकेत को शिकायत का कोई मौका नही देती थी और अनिकेत भी सरिता को शिकायत का कोई मौका नही देता था। सब हँसी खुशी चल रहा था कि एक दिन फिर दोनों में अनबन हो गयी बात इतनी बढ़ गयी कि सरिता ने अपने मायके फ़ोन करके भाई को बुला लिया और अपने बेटे को लेकर चली गयी। उधर अनिकेत की माँ की तबियत भी बहुत खराब थी और उधर सरिता भी घर छोड़कर चली गयी थी। किसी तरह अनिकेत अगले ही दिन अपनी ससुराल पहुंचा और सरिता को बुलाने गया लेकिन सरिता ने जाने से मना कर दिया और उसके घरवालों ने भी काफी बुरा भला कहा बिना सच्चाई जाने। अनिकेत को कुछ समझ नही आ रहा था कि वह क्या करे। एक तरफ उसकी माँ की तबियत और दूसरी तरफ यह सब ।ख़ैर वह निराश होकर घर लौट गया और अपने घर मे मां की देखभाल में जुट गया। उसकी माँ की तबियत दिन पर दिन बिगड़ती जा रही थी। इस दौरान अनिकेत और सरिता दोनो ने एक दूसरे से बात भी नही की थी और एक दिन उसको पता लगा कि सरिता ने उसके और उसके परिवार वालो के खिलाफ़ दहेज़ प्रताड़ना का केस कर दिया है। यह सुनकर अनिकेत बहुत आहत हुआ । वह बहुत परेशान था कि क्या करे या क्या न करे।वह इतना परेशान हो गया था कि उसको कोई रास्ता नही दिख रहा था। फिर अनिकेत ने भी सरिता के खिलाफ़ मुकदमा लिखाया। फिर शुरू हुआ दोनो के बीच आरोप और प्रत्यारोप लगाने का सिलसिला। दोनो को कोर्ट में अच्छे से सिखाया जाता कि क्या कहना है।जो लोग एक दूसरे के बिना रह नही सकते थे आज एक दूसरे की शक़्ल तक नही देखते थे। शादी में फेरे के समय जो कसमे वादे किए गए थे वह सब खत्म हो चुके थे। दोनो के मन मे बदले की भावना इस कदर थी कि क्या न क्या कर बैठे। दोनों ही झुकने को तैयार नही थे क्योंकि अगर एक पक्ष झुकता तो उसको समाज की चिंता थी कि कहीं हँसी न उड़े। लेकिन दोनों ही बदले की भावना में यह बात भूल चुके थे कि जिस समाज से वह डर रहे थे असल मे वही समाज उन दोनों की हँसी भी उड़ा रहा था। दोनो ही इस बात से अनजान थे क्योंकि बदले की भावना दोनो में कूट कूट कर भरी थी । मुकदमा चल रहा था कि अचानक अनिकेत की माँ की तबियत ज्यादा बिगड़ने लगी । डॉक्टरों ने ऑपरेशन के लिए कह दिया। ऑपरेशन कराया गया लेकिन कोई फायदा नही हुआ । अनिकेत की माँ अब चलने से बिल्कुल लाचार हो चुकी थी। ख़ैर मुकदमा चला और तीन साल साथ रहने के बाद दोनों के बीच वही हुआ जो नही होना था तलाक। दोनो ने आपसी सहमति से तलाक लिया । सरिता ने अपने बेटे सूर्या को अपने पति अनिकेत को दे दिया । और बदले में अनिकेत ने सरिता को जीवन निर्वाह के लिए एकमुश्त राशि दे दी। दोनो दुखी थे लेकिन कोई और भी था जो दोनो से ज्यादा दुखी था वो था सूर्या। उस बेचारे का क्या कसूर। उसको तो यह भी नही मालूम था कि क्या हो रहा है । बस उसको शायद यह मालूम था कि वह अपने पापा के साथ कही घूमने जा रहा है। दोनो ही रो रहे थे , लेकिन एक दूसरे से कुछ बोलने की हिम्मत किसी में नही थी। एक पल के लिए लगा कि दोनों कुछ बात करना चाहते है लेकिन एक दूसरे से कुछ कह नही पाए और दोनों रोते हुए कोर्ट से चले गए। आज दोनो का तलाक हो चुका है। दोनो अलग अलग रह रहे हैं, जो एक दूसरे के बिना रह नही सकते थे आज दोनो एक दूसरे से जुदा होके रह रहे है । पता नही कब क्या हो गया । सात जन्मों तक साथ रहने की कसम खाने वाले , एक दूसरे को जी जान से चाहने वाले आज एक दूसरे को देखना भी पसंद नही करते । दोनो एक दूसरे को बेइंतहा प्यार करते थे , एक दूसरे के बिना रह भी नही सकते थे । ऐसी क्या मज़बूरी की आज दोनो को यह कदम उठाना पड़ा। एक बसा बसाया घर उजड़ गया । दोनो की बस एक जिद और गलतफहमी की वजह से। मुकदमे के दौरान न कभी अनिकेत ने सरिता से कुछ बात की और ना ही सरिता ने अनिकेत से । शायद इसीलिए दोनों के बीच इतनी दूरियां और गलतफहमियां बढ़ गयी थीं। अब सब खत्म हो चुका था , दोनो अपने अपने जीवन को लेकर चिंता में थे । लेकिन कोर्ट के तलाक के आगे सब बेबस थे । दोनो के मन मे यही मलाल था कि एक बार तो कोई बात करता , लेकिन हिम्मत किसी की नही हुई, कोई भी आगे नही बढ़ा और दोनो एक दूसरे से अलग हो गए।






 दोस्तों आप लोगों से एक बात कहना चाहता हूं कि पति और पत्नी का रिश्ता एक पवित्र रिश्ता है।इसे कभी भी टूटने न दें। कोई भी विवाद हो तो उसे तुरंत बातचीत से सुलझा लें। क्योंकि बातचीत से बड़ी से बड़ी समस्या भी हल हो जाती है। रिश्तो के बीच कभी गलतफहमी न पालें और एक दूसरे का सम्मान करें। बात न करने से अक्सर दूरियां भी बढ़ जाती हैं और गलतफहमियां भी। इसलिए आप लोगो से विनम्र निवेदन है कि आप लोग भी अनिकेत और सरिता जैसी गलती न करे , जो उन दोनों ने की। सिर्फ प्यार करना ही काफी नही है दोस्तो एक दूसरे की खुशी के लिए कभी कभी अपने शौक भी मारने पड़ते हैं। यही जीवन है और जीवन की यही सच्चाई है दोस्तों। पति पत्नी का रिश्ता ऊपरवाले का बनाया ऐसा रिश्ता है जिसके आगे सारे रिश्ते फीके पड़ जाते हैं। अगर आप भी ऐसी ही स्थिति से गुजर रहे हों तो आपसे मेरा निवेदन है कि आप भी तुरंत बिना देर किए हुए अपने जीवन साथी से बातचीत करें और उस समस्या का समाधान निकालिये क्योंकि बातचीत से ही हर समस्या का हल निकल सकता है ना कि गुस्से में कोई फैसला लेकर। आप भी सरिता और अनिकेत की तरह बातचीत बंद करने की गलती न करे और अपने बीच दूरियां न बढ़ने दें। एक बातचीत आपका घर उजड़ने से बचा सकती है। 

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