Story Of An Innocent Boy

           Story Of An Innocent And Hard work Boy










दोस्तों आज मैं  आपके सामने ऐसी कहानी लेकर आया हूँ जो यह बताती है कि जीवन मे कभी भी कितनी भी परेशानी आ जाये , लेकिन हमको अपने लक्ष्य से भटकना नही चाहिए। कभी कभी हमको लगता है कि ऊपर वाले ने सारी परेशानी  हमें  ही  दे  दी  हैं , लेकिन   ऐसा  नही  है।  जीवन  मे  परेशानी  तो  आती  जाती  रहती  हैं  लेकिन  जो  लौटकर  नही  आता , वह  है  समय  ।  इसलिए  समय  रहते  समय  की  कीमत  को   पहचानिए  और  अपने  लक्ष्य  को  पाने  के  लिए  जी  जान  से  महनत  करिये  ।




एक  गांव में  सौरभ (काल्पनिक  नाम )  लड़का  था ,  जो  बहुत  आलसी  था  । उसकी  उम्र  दस  वर्ष  थी। सब  उसको  आलसी  आलसी  कहकर  पुकारते  थे। वो  रोज  सुबह  देर  से  उठता  था  और  दिन  भर  सिर्फ  खेलता  रहता  था ।  उसके  सारे  दोस्त  स्कूल  जाते  और  अच्छे  से  पढ़ाई  भी  करते  थे  , लेकिन  सौरभ  स्कूल  नही  जाता  था  बल्कि  दिन  भर  खेलता  रहता  था । वह  दो  बार  पांचवीं  कक्षा  में  फेल  भी  हो  चुका  था ।  इस  बात  से  उसके  घरवाले  भी  बहुत  परेशान  हो  चुके  थे ।  सौरभ  आये  दिन  डाँट  खाता  लेकिन  उसको  कोई  फर्क  नही  पड़ता  था  ।  सौरभ  के  घर  की  आर्थिक  स्थिति  कोई  खास  अच्छी  नही  थी  ,  बस  किसी  तरह  घर  का  खर्चा  चल  रहा  था ।  उसके  पिता  एक  दुकान  में  सफाई  का  काम  करते  थे  और  माँ  घर  घर  जाकर  साफ  सफाई  का  काम  करती  थी  ।  लेकिन  अनिकेत  को  इससे  कोई  फ़र्क  नही  पड़ता  था  ।  वह  बस  खेल  में  ही  दिन  गुजार  देता  था  ।  एक  दिन  सौरभ  के  पिता  अपने  काम  से  घर  लौटकर  आ  रहे  थे  कि  अचानक  किसी  कार  से  वो  टकरा  गए  और  उनकी  मृत्यु  हो  गयी  ।  अब  घर में  मातम  सा  छा  गया ।  सौरभ  बहुत  रोया  और  अपने  पापा  के  शरीर  से  लिपटकर  रोने  लगा  और  कहने  लगा  पापा  आप  उठ  जाइये  मैं  मन  लगाकर  पढ़ाई  करूँगा  और  आपको  कभी  शिकायत  का  मौका  नही  दूंगा ।  लेकिन  सौरभ  को  नही  पता  कि  अब  उसके  पापा  उससे  काफी  दूर  जा  चुके  थे , अब  सौरभ  मन  ही  मन  खुद  को  कोसता  रहता  ।  उसको  सब  याद  आ  रहा  था  कि  उसके  पापा  उसके  लिए  कुछ  न  कुछ  शाम  को  काम  से  आते  समय  लेकर  आते  थे ,  कभी  भी  खाली  हाथ  नही  लौटते  थे ।  एक  दिन  वो  अपने  पापा  की  अलमारी  खोल  कर  देख  रहा  था  कि  अचानक  उसकी  नज़र  एक  छोटी  सी  डायरी  पर  पड़ी ,  जिसमें  लिखा  था  कि  उसके  पापा  ने  किसी  से  उधार  लिए  और  वापस   किये  ।  उसने  देखा  कि  उसके  पापा  ने  उसकी  बर्थडे  के  लिए  अपने  मालिक  से  रुपये 500 उधार  लिए  थे  और  अपनी  सैलरी  से  उन्होंने  कटवा  दिए  थे । 




 सौरभ  के  आँसू  रुकने  का  नाम  ही  नही  ले  रहे  थे ।  उसने  सोचा  कि  मेरे  पापा  ने  मेरी  खुशी  के  लिए  सब  कुछ  किया  और  मैनें  अपने  घरवालों  की  कभी  कोई बात  नही  मानी ।  वह  मन  ही  मन  खुद  को  कोसने  लगा  और  कसम  खायी  की  वह  भी  मेहनत  करेगा ।  उसने  मन  लगाकर  पढ़ाई  की  और  अपने  स्कूल  में  सबसे  अच्छे  नम्बरों  से  पास  हुआ । उसके  बाद  सौरभ  ने  आगे  की  पढ़ाई  पूरी  की  और  आज  वो  एक   इंजीनियर   बन  चुका  है । उसने  कड़ी  मेहनत  से  सब  कुछ  पा  लिया  था  बस  नही  ला  सकता  था  तो  अपने  पिता  को  और  उनके  साथ  बिताए  हुए  पलों  को ।  


आप   लोग  भी  समय  की  कीमत  को  पहचानिये  और  समय  रहते  उसका  उपयोग  करिये  क्योंकि  एक  बार  समय  हाथ  से  निकल  गया  तो  वापस  नही  आता ।  

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