Story Of A Success Man

हेलो  ,  दोस्तों  ये  उस  इंसान  की  कहानी  है , जो  ये  मान  चुका  था   कि  अब  वह  कुछ  नही  कर  सकता  ,  लेकिन  अचानक  उसके  जीवन  मे  कुछ  ऐसा  मोड़  आया  जिससे  उसकी  जिंदगी  बदल  गयी । उसने  अपनी  मेहनत  से  अपनी  मंजिल  पा  ली ।




सतीश ( काल्पनिक  नाम )  जो  कि  एक  कपड़े  की  दुकान  पर  काम  करता  था । आमदनी  ठीक  ठाक  ही  थी  , उसके  पिताजी  एक  फोर्थ  क्लास  कर्मचारी  थे और  रिटायर  हो  चुके  थे  और  माँ  भी  थी  जो  गृहिणी  थीं । घर  में  बस  तीन  लोगों  का  परिवार  था , लेकिन  आमदनी  कोई  खास नही  थी । सारी  जिम्मेदारी  सतीश  पर  ही  थी । उसके  पिता  जी  का  जब  वह  दस  साल  का  था  तो  एक्सीडेंट  में  एक  पैर गवां  चुके  थे । जिसकी  वजह  से  सतीश  बहुत  ज्यादा  पढ़  भी  नही  पाया  था  और  अपने  पिता  जी  की  देखभाल  में  ही  रहता  था  ।  उसके  सभी  दोस्त  पढ़ लिख कर  अच्छी जगह  नौकरी  पा गए  थे  लेकिन  बेचारा  सतीश  ज्यादा  नही पढ़  पाया  था  और  सिर्फ  बारहवी  तक  ही  पढ़  पाया ।  जिसकी  वजह  से  उसकी  बहुत  अच्छी  नौकरी  भी  नही  लग  सकती  थी  । हालांकि  सतीश  को  बचपन  से  व्यापार  करने  का  काफी  शौक  था । लेकिन  आर्थिक  स्थिति कोई  खास  नही  थी , इसलिए  वह  शांत  ही  रहा  और  चुप  चाप  कपड़े  की  दुकान  पर काम  करने  लगा ।

एक  दिन  की  बात  है  वह  नदी  किनारे  बैठा  था  और  ध्यान  से  नदी  के  किनारे  पड़े  हुए  एक  पत्ते  को  देखे  जा  रहा  था  , उस  पत्ते  पर  एक  चींटा   भी  था  जो  बार  बार  पत्ते  पर  चढ़ने  की  कोशिश  कर  रहा  था । चींटा  जितनी  बार  चढ़ने  की  कोशिश  करता , पानी  का बहाव  उसे  धकेल  कर  गिरा  देता  था । लेकिन  अंत  मे  चींटा  पत्ते  पर  चढ़  गया  और  अपनी  जान  बचा  ली । सतीश  यह  सब  बड़े  ध्यान  से  देख  रहा  था । वह  सोचने  लगा  कि  अपनी  जान  बचाने  के  लिए  चींटा  ने  कितनी  मेहनत  की  और  अंत  मे  वह  सफल  भी  हुआ । सतीश  मन  ही  मन  कुछ  सोचने  लगा  और  फिर  उसको  व्यापार  करने  का  आईडिया  आया । इतने  दिनों  से  वह  कपड़े  की  दुकान  पर  काम  कर  रहा  था  तो उसको  काफी जानकारी  भी  हो  गयी  थी । उसने  लोन  लेकर  एक  छोटा  सा  कपड़े  का  व्यापार  शुरू  किया  और  फिर  धीरे  धीरे  उसका  व्यापार  काफी  चलने  लगा । और  अंत  मे  वह  एक  सफल  व्यवसायी  बना । अपनी  मेहनत  और  लगन से  उसने  अपना  व्यापार  काफी  फैला  लिया  था । आज  वह  काफी  सफल  व्यवसायियों  में  गिना  जाता  है ।


दोस्तो   , बड़ा  बनने  का  सपना  देखना  गलत  नही  है  बस  जरूरत  होती  है  उसको  साकार  करने  की  और  हिम्मत  की ।
अगर  सतीश  भी  अपने  आप से  समझौता  कर  लेता  तो  आज  भी  वह  कपड़े  की  दुकान  पर  काम  कर  रहा  होता  न  कि  ख़ुद  का  व्यापार । इसलिए  हमें  भी  अपनी  उम्मीद नही  छोड़नी  चाहिए  और  अपना  पूरा  ध्यान  अपने  लक्ष्य  पर  ही  रखना  चाहिए  और  अपने  लक्ष्य  से  भ्रमित  नही  होना  चाहिए। 

Comments

Post a Comment